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Volume : III, Issue : V, June - 2013 हिंदी साहित्य में किन्नर विमर्श प्रा. सिंधू खिलारे Published By : Laxmi Book Publication Abstract : भारतीय समाज में किन्नर समुदाय (ट्रांसजेंडर या थर्ड जेंडर) की उपस्थिति हजारों वर्षों से रही है, परंतु मुख्यधारा समाज और साहित्य में उन्हें लंबे समय तक हाशिये पर रखा गया। समाज ने उन्हें या तो आध्यात्मिक सत्ता के रूप में महिमामंडित किया या तिरस्कार और उपेक्षा के भाव से देखा। आधुनिक काल में जब साहित्य ने वंचित वर्गों की आवाज़ को मंच देना शुरू किया, तब किन्नर विमर्श भी एक नए सामाजिक-साहित्यिक विमर्श के रूप में उभरा। Keywords : Article : Cite This Article : प्रा. सिंधू खिलारे, (2013). हिंदी साहित्य में किन्नर विमर्श. Indian Streams Research Journal, Vol. III, Issue. V, http://oldisrj.lbp.world/UploadedData/6714.pdf References : - -
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