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Volume : I, Issue : III, April - 2011 जनवादी साहित्य और कविता का अन्तर्सम्बन्ध डाॅ. विशाल श्रीवास्तव Published By : Laxmi Book Publication Abstract : यह शोध-पत्र जनवादी साहित्य और कविता के पारस्परिक अन्तर्सम्बन्ध का विश्लेषण करता है। जनवादी साहित्य का मूल उद्देश्य समाज के श्रमिक, वंचित और हाशिए पर स्थित वर्गों के जीवन-संघर्ष, शोषण और आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देना है, जबकि कविता अपनी संवेदनात्मक शक्ति, प्रतीकात्मकता और भाषा-वैविध्य के माध्यम से इन यथार्थों को अधिक प्रभावी ढंग से संप्रेषित करती है। Keywords : Article : Cite This Article : डाॅ. विशाल श्रीवास्तव, (2011). जनवादी साहित्य और कविता का अन्तर्सम्बन्ध. Indian Streams Research Journal, Vol. I, Issue. III, http://oldisrj.lbp.world/UploadedData/6718.pdf References : - अग्रवाल, भारत भूषण (1966), नई कविता का आत्मसंघर्ष, इलाहाबाद, लोकभारती प्रकाशन
- चतुर्वेदी, रामस्वरूप (1997), हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास, नई दिल्ली, लोकभारती प्रकाशन
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